| Chapter: 8 | अध्याय : ८ |
| Verse Number: 5 | छन्द सँख्या : ५ |
| Speaker: Kṛiṣhṇa | वक्ता: कृष्ण |
अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम्। यः प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशयः।।
Translation
And whoever, at the end of his life, quits his body remembering Me alone at once attains My nature. Of this there is no doubt.
अनुवाद
और जीवन के अन्त में जो केवल मेरा स्मरण करते हुए शरीर का त्याग करता है, वह तुरन्त मेरे स्वभाव को प्राप्त करता है | इसमें रंचमात्र भी सन्देह नहीं है |
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