| Chapter: 2 | अध्याय : २ |
| Verse Number: 41 | छन्द सँख्या : ४१ |
| Speaker: Kṛiṣhṇa | वक्ता: कृष्ण |
व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन। बहुशाखा ह्यनन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम्।।
Translation
Those who are on this path are resolute in purpose, and their aim is one. O beloved child of the Kurus, the intelligence of those who are irresolute is many-branched.
अनुवाद
जो इस मार्ग पर (चलते) हैं वे प्रयोजन में दृढ़ रहते हैं और उनका लक्ष्य भी एक होता है | हे कुरुनन्दन! जो दृढ़प्रतिज्ञ नहीं है उनकी बुद्धि अनेक शाखाओं में विभक्त रहती है |
Read More | और पढ़े