| Chapter: 2 | अध्याय : २ |
| Verse Number: 30 | छन्द सँख्या : ३० |
| Speaker: Kṛiṣhṇa | वक्ता: कृष्ण |
देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत। तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि।।
Translation
O descendant of Bharata, he who dwells in the body can never be slain. Therefore you need not grieve for any living being.
अनुवाद
हे भारतवंशी! शरीर में रहने वाले (देही) का कभी भी वध नहीं किया जा सकता । अतः तुम्हें किसी भी जीव के लिए शोक करने की आवश्यकता नहीं है ।
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